Ek soch September 06, 2025 हर सोच का एक मयार होता है। कभी अन्दर तो कभी बाहर का आगाज़ होता है। जहाँ जाओ, वहाँ कुछ और एहसास होता है। कभी कमतर तो कभी पूरे होने का नक़ाब होता है। दुनिया की इस कशमकश का हर पल एहसास होता है। Read more